तुम आए तो…

तुम आए तो
लगा जैसे
मलयाचल से
बहती हवा सीधे
मेरे दरवाजे से
मेरे दिल में समा गई हो

तुम आए तो
लगा
जैसे सूखे बाग में
बहार आई हो

तुम आए तो
लगा जैसे
खिलने लगे हों
कमल
मानसरोवर में

तुम आए तो
लगा जैसे
इस दर्द की खामोशी में
फैल गई हो सुर लहरी

जैसे कोई बाँसुरी
गूंज जाती है रात के सन्नाटे में

बड़ा एहसान तुम्हारा
कि इतने दिनों बाद
तुम आए…