हम गुनहगार हो गए

वो जुल्म करता रहा
बदनाम ना हुआ,
हम इक सवाल करके
गुनहगार हो गए।

वो मिलाता रहा नज़रें
हर इक कमसिन से,
हमने इक नज़र क्या देखा
बेज़ार हो गए।

उसने किए सवाल
कई गफ़लत में,
मिरे सवाल सारे
तलवार बन गए।

उसके लिए थे फूल
बिछे गलियों में,
मिरे ख़ातिर
काँटों के हार बन गए।

उसकी गालियाँ भी
लगती थीं नेमतें,
और मिरे सजदे भी
ख़ार बन गए।

वो जुल्म करता रहा
बदनाम ना हुआ,
हम इक सवाल करके
गुनहगार हो गए।