रात की मल्लिका

आज सोते समय
लगा जैसे
एकाएक मेरे कमरे में भीनी सी
खुशबू फैल गई।

कुछ पल तो मैं अवाक् रही
फिर याद आया
अरे
मेरे आँगन से आ रही है
ये मदमाती गंध
रातरानी के फूलों से!!

“ओ रात की मल्लिका
क्या ख़ूब जलवे हैं तेरे!”

मन ही मन ये कहते हुए
धीरे से मैं
आ के लेट गई पलंग पर…!!

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