तिफ़्ल – ए – सिराज हूँ ज़िंदगी

(एक ग़ज़ल)

गर ज़ीस्त ग़मजदा है तो क्या

दर्द का आईना है तो क्या

तिफ़्ल – ए – सिराज हूँ ज़िंदगी मैं भी

हर तरफ़ आँधियाँ हैं तो क्या ।

बयाँ करने की चाहत है

नहीं रूह – ए – बयाँ है तो क्या

दफ़्न किये हैं मैंने ख़्वाबों के शोर कहीं

ये कूचा – ए – तन्हाइयां हैं तो क्या।

इस वीराना – ए – दिल में भी होगी

बू – ए – गुल – ए – मोहब्बत कहीं

हर तरफ़ क़हत की बर्बादियाँ हैं तो क्या।

अब्र – दीदा ना होना

कि नहीं बरसी है शबनम अभी

ये तो इब्तिदा – ए – ज़वाल है बस

इंसिराम – ए – ज़िंदगी है क्या… ।

[ ज़ीस्त – life , तिफ़्ल – child, सिराज – lamp/candle, कूचा – street, बू – ए – गुल – ए – मोहब्बत – smell of the love flower, क़हत – famine, अब्र – दीदा – teary eyed, शबनम – dew, इब्तिदा – ए – ज़वाल – start of the sundown, इंसिराम – ए – ज़िंदगी – conclusion of life ( death ) ]

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